बर्थडे पर मोमबत्तियाँ क्यों बुझाई जाती है ?

बर्थडे पर मोमबत्तियाँ क्यों बुझाई जाती है ?

बर्थडे पर मोमबत्तियाँ क्यों बुझाई जाती है ?

दरअसल साल भर में एक बार हर किसी का बर्थडे जरूर आता है, और इस दिन को स्पेशल बनाने के लिए हमें बेसबरी से इंतजार भी रहता है ! इन पलो को यादगार बनाने के लिए कोई अपने दोस्तों के साथ मस्ती करता है तो कोई लॉन्ग ड्राइव पर जाता है ! कुछ लोग ऐसे भी होते है जो अपनी खुसी के मुताबित अलग अलग गतिविधियां करते है ! लेकिन इन सबके बिच कुछ लोग अपने बर्थडे पर केक काटना नहीं भूलते ! बर्थडे वाले दिन लोग कैंडल बुझाकर केक काटते है तो आज हम आपको बताते है की बर्थडे पर मोमबत्तियाँ क्यों बुझाई जाती है ?

birthday cack and candle

दरअसल बर्थडे केक और कैंडल को लेकर कई कहानिया है, लेकिन आमतौर पर लोग यह मानते हे की बर्थडे केक पर कैंडल लगाने का रिवाज प्राचीन ग्रीस यूनान में सुरु हुआ था ! उस समय लोग जली हुई कैंडल लगे केक, आर्केमिस जो की ग्रीस भगवान् के है उनके मंदिर ले जाते थे ! वह उन कैंडल का प्रयोग आर्केमिस कच्चिन बनाने के लिए करते थे ! बहुत सी संस्कृतिओ में माना जाता है की कैंडल बुझाने के बाद उशका धुँआ लोगो की प्रार्थना को भगवान् तक पहुंचाता है ! और यह  परम्परा पीढ़ी दर पीढ़ी चली आ रही है, इशलिये लोग बर्थडे केक पर लगी कैंडल बुझाने से पहले कोई ना कोई विश जरूर मांगते है ! जिससे उनकी बात धुएं के माध्यम से भगवान् तक पहुंचे और उनकी मनोकामना पूरी हो जाए !

भारतीय परम्परा के हिसाब से

diya

लेकिन भारतीय परम्परा इससे एकदम अलग है ! दरअसल भारत में बर्थडे केक काटने और कैंडल जलाने की परम्परा कही ना कही पश्चिमी देशो से ही आई  है ! जबकि भारतीय हिन्दू संस्कृति में बर्थडे को बिलकुल अलग तरीको से मनाने की सिख भी दी गौ है ! भारतिया परम्पराओ के जानकार का मानना है की हिन्दू  धर्म में दीपक को अग्नि देव का स्वरुप माना गया है ! अग्नि देव की उपस्तिति से नकारात्मक ऊर्जा और बुरी शक्तिया दूर हो जाती है, जिसका जिक्र उपनिषदो में भी किया गया है ! प्रकाश नवीनता का सूचक है, तमाम लोग मानते हे की जन्मदिन के मौके पर दीपक या कैंडल बुझाने से हम आने वाले समय को नकारात्मकता की और ले जाते है, इस लिए कैयो का मानना है की बर्थडे पर कैंडल भुजाने की बजाय भगवान् के सामने घी का दिप जलाया जाना चाहिए !

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