क्यों किये 3000 करोड़ बर्बाद ? स्टेचू ऑफ़ यूनिटी का काला सच जो आप नहीं जानते

statue of unity

statue of unity

ये है दुनिया की सबसे ऊँची मूरत ” स्टेचू ऑफ़ यूनिटी “. १८२ मीटर ऊँची ये मूरत है भारत के पहले गृहमंत्री सरदार वल्लभभाई पटेल की ! अमेरिका की स्टेचू ऑफ़ लिबर्टी से दोगुनी ऊँची स्टेचू ऑफ़ यूनिटी का अनावरण ३१ अक्टूबर २०१८ को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने किया ! स्टेचू ऑफ़ यूनिटी सरदार सरोवर के डैम के दक्षिण में स्तित ( statue of unity location ) नर्मदा नदी के एक टापू पर 3000 करोड़ रुपये (statue of unity cost) के भारी भरखम खर्च पे बनवाई गई है !

statue of unity, tallest statue in the world
Tallest statue in the world- Image source

Statue of Unity Cost -क्यों किये 3000 करोड़ बर्बाद ?

इंडियन कंपनी L & T ने ये प्रोजेक्ट रिकॉर्ड 33 महीनो में पूरा किया लेकिन इस स्टेचू की जो भव्यता हमें दिखाई जा रही है, क्या वही पूरा सच है ? शायद नहीं, 3000 करोड़ (statue of unity cost) की इतनी बड़ी रकम जो इस मूर्ति को बनाने में खर्च की गई ! अगर जरुरतमंदो की मदद में ली जाती तो कितनी जिंदगियां बदल शकती थी ! क्या खुद सरदार पटेल ऐसी मूरत बनाने की इजाजत देते ? शायद नहीं ! आज के इस लेख में हम आपको बताएँगे की दुनिया की सबसे ऊँची प्रतिमा “स्टेचू ऑफ़ यूनिटी” का काला सच क्या है ! किसी भी राय को बनाने से पहेले इस लेख को अवश्य पूरा पढ़े !

आपको बता दे की 31 अक्टूबर 2018 को देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भारत के लोह पुरुष सरदार वल्लभभाई पटेल की काश्य की बनी मूर्ति का अनावरण किया ! सरदार पटेल हिंदुस्तान के एक महान राजनेता थे ! उन्होंने आजादी के बाद कई रियासतों को भारत में मिलाने के लिए एहम कदम उठाये थे ! और इस लिए इस प्रतिमा का नाम भी “स्टेचू ऑफ़ यूनिटी” यानी की एकता की मूरत रखा गया !

Statue of Unity images
statue of unity image

लोह पुरुष की इस विशाल मूर्ति का सपना नरेंद्र मोदी ने गुजरात के मुख्यमंत्री रहते हुए देखा था ! और अब प्रधानमंत्री के तौर पर उन्होंने अपने इस सपने को पूरा किया ! एक और जहा कुछ लोग इसकी भव्यता की तारीफ़ करते नहीं थक रहे वही कुछ लोग इस स्टेचू के निर्माण पर कई सवाल खड़े कर रहे है !

मेड इन चाइना ?

सबसे पहला प्रश्न : इस प्रोजेक्ट में लगे चाइनीस मटीरियल और वर्कफोर्स को लेकर उठा ! आपको बता दे की इस स्टेचू को बनाने के लिए बीजेपी ने पुरे देश में एक लोहा कम्पैन चलाया था ! जिसमे लाखो किसानो ने अपने पुराने लोहे के औजार दान में दिए ! इस लोहे को पिघलाकर इस स्टेचू को बनाया जाना था ! लेकिन ऐसा हुआ नहीं, इस पुरे प्रोजेक्ट का टेंडर लार्सन एंड टुब्रो कंपनी के पास था ! जिसने इस स्टेचू को बनाने में इस्तेमाल किया गया पित्तल चाइना की टीक्यू आर्ट फॉउंडरी से आयात किया ! इस प्रोजेक्ट पर हजारो चाइनीज़ मजदूरों और अन्जीनियरों ने काम किया ! इसका स्टील फ्रेम वर्क तक चीन से मंगवाया गया था ! अब अगर इस स्टेचू को कई लोग “मेड इन चाइना” कह रहे है तो क्या गलत है ? ये सभी पेनल्स और डिज़ाइन भारत में भी तैयार किये जा शकते थे !

Statue of Unity Opening ceremony
Statue of Unity

वही इस प्रोजेक्ट के आसपास के लोग किन परिस्तितियों का सामना कर रहे है इसका आप अंदाजा भी नहीं लगा शकते ! सबसे ज्यादा नुकशान उन किशानो का हुआ है जो नर्मदा नदी के किनारे तो रह रहे है लेकिन अपने खेतो में पानी के लिए तरस रहे है ! सरदार सरोवर के 9 किलोमीटर के दायरे में आमडला, भादरवा, और सांडरोली जैसे गांव है, इसमें जो नहेरे बनी है वो बेहद कमजोर है ! नर्मदा का पानी गुजरात के दूरदराज इलाको में तो पहोच रहा है लेकिन यहाँ नहीं पहुँचता ! इस मूर्ति के आसपास 20 गांव ऐसे है जहा लोगो को पानी जैसी बुनियादी जरूरतों के लिए भी मसक्कत करनी पड़ती है !

प्रोजेक्ट का विरोध !

इस प्रोजेक्ट से 72 गांव के लगभग 75000 लोग प्रभावित हुए है ! यह प्रोजेक्ट में जिन किशानो की जमीने ली गयी इन्हे अभी तक उसका मुआवजा भी नहीं दिया गया है ! एक रिपोर्ट के मुताबित नर्मदा डिस्ट्रिक्ट में आदिवासियों की उच्च शिक्षा का स्तर गुजरात में सबसे कम है ! यहाँ सिर्फ 5% युवा ही उच्च शिक्षा प्राप्त कर पाते है ! 6 लाख की आबादी वाले इस डिस्ट्रिक्ट में एक भी ऐसा अस्पताल नहीं है जहा ICU जैसी सुविधा हो ! यहाँ की 85% महिला कुपोषण की शिकार है ! यहाँ के आदिवासी इतने गरीब है की उनके पास शरीर ढकने के लिए कपडा और रहने के लिए पक्का घर तक नहीं है !

narmada bachao andolan
Narmada Bachao Andolan

इसी प्रेजेक्ट के हिस्से में बने बाँध से तरवी जनजाति के कई गांव जलमग्न होने की कगार पर है ! इतना ही नहीं, जाम्बुघोड़ा के नारुकोट के ८ गांव, वहा रिसोर्ट बनाने के लिए खाली करवा दिए गए ! रिहेबिलिटेशन पैकेज के मुताबित जमीन या पैसे भी हिसाब से नहीं दिए गए ! स्थानीय निवासियों ने कई बार प्रदर्शन कर अपना रोष भी व्यक्त किया लेकिन सुनने वालो की बहुत कमी है ! विस्थापितों की रोजीरोटी छीन गई, घर खेत सब चला गया !

पब्लिक मनी एक मूर्ति पर खर्च कर देना कहा की समझदारी है ?

सरकारी मुहावजे से जिंदगी कट जायेगी ऐसा लगता नहीं ! अब आप ही बताये जिस देश में गरीब आज भी भूख से मर रहा हो ! किसान चंद हजार कर्जे तले दबकर आत्महत्या करने को मजबूर हो उस देश में 3000 करोड़ रुपये (statue of unity cost) की पब्लिक मनी एक मूर्ति पर खर्च कर देना कहा की समझदारी है ?

पर्यटन की जो सम्भावनाये सरकार दिखा रही है ! उस पर अमल भी करे तो ROI यानी रिटर्न ऑफ़ इन्वेस्टमेंट में अभी कई दसक लग जाएंगे ! ये कैसा विकास मॉडल है, एक मूर्ति के नाम पर हजारो करोड़ खर्च कर दिया जाए वो भी तब जब खुद के अपने लोग रोटी कपडा और मकान के लिए तरस रहे हो !

सरदार पटेल जीवित होते तो उन्हें ये कभी मंजूर ना होता ! 3000 करोड़ से (statue of unity cost) कितने हॉस्पिटल, कितने स्कूल, और कितनी बुनियादी सुविधाएं हम यहाँ पहुंचा सकते ! इसका अंदाजा लगाया जा सकता है ! तय करना उस करदाता का काम है जो सरकारों द्वारा अपने दिए कर का सही इस्तेमाल करने में रूचि नहीं लेता ! उम्मीद है चश्मे से कुछ धुल तो जरूर हटी होगी !

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Disclaimer: इस जानकारी की वास्तविकता सुनिश्चित करने का हर सम्भव प्रयास हमारी और से किया गया है ! इस लेख में दी गई जानकारी न्यूज़पेपर्स और इंटरनेट पर उपलब्ध जानकारी के आधार पर दी गई है “Gkhindinews.com” इस के सच या जूथ होने का दवा नहीं करता , लेखमें इस्तेमाल की गई फोटोज उदहारण के तौर पे दिखाई गई है !

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